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मेरे लंड से रस की पिचकारियां छूट रहीं थीं तो उधर बहूरानी की चूत भी सुकड़-फैल कर मेरे लंड को निचोड़ रही थी.

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अब बाथरूम के दरवाजे से लॉक निकल जाने से उस छेद से बाथरूम के अन्दर का सीन दिखने लगा था. पापा ने अब अपने होंठ चुत पर टिका दिए थे ताकि सुमन का रस सीधा उनके मुँह में जाए.

मेरे चाचा की फैमिली को शादी में जाना था, वो लोग घर जाते ही फ़ौरन निकल गए. पप्पू ने उसकी नज़र को पढ़ा, पर ध्यान ना देते हुए पीछे से उसे और दबा के अपना हाथ हल्के से उसके पसीने से गीले नंगे पेट पे रखते हुए बोला- साला कितनी आबादी बढ़ गई है देश की, ठीक से सफ़र भी नहीं कर सकते. पर मैं फिर भी जोर लगाता रहा। लंड अन्दर घुस ही नहीं रहा था। तो मैंने फिर से थोड़ा बाहर निकाला और फिर जोर से धक्का लगाया.

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उन के पति एक फैक्ट्री में जॉब करते हैं, उनकी ड्यूटी की शिफ्ट बदलती रहती है, कभी दिन में तो कभी रात को.

मैंने देखा कि सुरैया भाभी बिना पैंटी के थी और उसने अपनी चुत की झांटें भी साफ कर रखी थीं. मैंने हंसकर कहा- क्या इच्छा है बालिके तेरी?महाराज मैं आपका लंड चूसना चाहती हूँ. मैंने भी अचानक आए माहौल को हल्का करने की कोशिश करते हुए रंजु से मोबाइल वापस लिया.

अब मेरे हाथ अंजलि के दोनों चुचों पर थे और वह पूरे लंड को चुत में लेकर झटके मार रही थी. आज भी दोनों ममेरे भाई रात में घर नहीं आऐंगे, ऐसा बोल कर अपने मित्रों के साथ घूमने चले गए थे. मारवाड़ी सेक्सी दे वीडियोमैं झट से बाड़ी में गयी और मामा के लंड से थोड़ी पतली वाली बैंगन खोजने लगी, मैं भी नहीं चाहती कि मेरी गांड का छेद इतना खुल जाए कि मामा को मज़ा ना दे पाऊँ.

इसलिए हमने अपने कपड़े ठीक किए और चादर धोने चले गए। फिर कमरे में आकर दूसरी चादर बिछाई और फिर से चुदाई के काम पर लग गए।उस रात हमने दो बार और चुदाई की और मैंने हर बार वीर्य उसकी चूत में ही छोड़ा।जब सुबह उठे तो उसने अपनी एक सहेली को फ़ोन किया. अब मैं उसके नंगे बदन पर चुंबनों की बारिश करता हुआ नीचे की ओर आ गया और कुछ देर गहरी नाभि से खेलता रहा.

घर का दरवाज़ा खुला था, दोनों अन्दर आये और हॉल में लगे सोफे पर गिर गए. उस दिन हमें गाँव के 2 लड़कों ने देख लिया और आते जाते उसको ताने मारने लगे, फिर मेरे धमकाने और समझाने पर रुके. एक दिन सुमन भाभी थोड़ी अपसेट सी दिखीं, मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

मुझ पर नशा सवार होने लगा था और मेरा मूड बहुत ज्यादा सेक्सी हो गया था. मैंने पूछा- इसे तुम्हारा लंड अपनी चुत में लेने में तकलीफ़ नहीं होती. पावरोटी की तरह फूली बुर पर सुनहरे रोयें और उसके ठीक ऊपर गहरी नाभि किसी की भी नियत खराब करती इठला रही थी.

अगले दिन सुबह मैं जब बरामदे से होते हुए दूसरे कमरे में जा रहा था कि अचानक तभी अर्चना ने मुझे पीछे से पकड़ लिया, अपने सीने से चिपका कर मुझे खींचते हुए चूमा और जल्दी से दूसरे कमरे में चली गईं.

यह कहानी मेरे एक साल पहले घटी थी, जब मैं मुंबई से नागपुर ऑफिस के काम से जा रहा था. कुछ देर में मेम के चीखने की आवाज आई, मैं भागा… और छत पर जाकर देखा कि मेम पूरी भीग चुकी थीं और रो रही थीं.

कितना दम है मेरे लौड़े में!” कहते हुए अमित ने अपना लंड बाहर निकाल लिया और उस्मान को कुछ इशारा किया, जो माया नहीं देख पाई. उस दिन पापा घर पर ही थे, वे काम पर नहीं गए थे क्योंकि चाचा 15-20 दिनों के लिए बाहर गए थे. आप लोगों ने कभी किसी लड़के के नज़दीक जाने ही कहां दिया? मैं अपनी इस जवानी को जैसे तैसे झेल रही हूँ.

फिर पापा ने मकान तुड़वाने का और बनवाने का काम एक कांट्रेक्टर को दे दिया, जो हमारे पैतृक गांव का था. सुमन- बस बस ज़्यादा दाँत मत निकाल… नहीं सारे तोड़ दूँगी चल अब जल्दी से लंड को घुसा भी दे… चुत में आग लगी है. फिर डॉक्टर मैडम आई, उसने टेबलेट्स दीं, उसको रात को यूज़ करने के लिए और बोला- कल और आना है बस.

बीएफ पिक्चर देना फिर थोड़ी देर बाद जब मुझे लगा कि मैं आउट होने वाला हूँ तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से उस की गांड मारने लगा और फिर जल्दी ही उसकी गांड में ही पूरा का पूरा झड़ गया. आखिरी में मैंने उनको मेरी गांड में लंड डालने को कहा, तब 10 मिनट के बाद उनका पानी निकला.

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चाचाजी- शाहीन मेरी जान मेरी ख्वाइश कब पूरी करोगी?मैं- कौन सी?चाचाजी- जान, मैं तुम्हें अपनी दुल्हन बनाना चाहता हूँ और हमारी सुहागरात. जय बोला- इस समय पता नहीं कौन आ गया?मैंने कहा- अब तो रहने दो और जा कर देखो कि कौन आया है. फिर लगभग़ 5 मिनट के बाद वो औरत वापस आई और मेरा हाथ पकड़ कर बोली- मिस्टर संदेश, आप आराम से मेरे साथ आइए.

दस मिनट त़क मैं अंजलि को ताबड़तोड़ ठोकता रहा, तभी अंजलि ने अपनी टाँगें ढीली कर दीदी मतलब उसकी फुद्दी ने पानी छोड़ दिया था. इतना बड़ा लंड… देवर जी, अपनी भाभी पर रहम करो… मैं तुम्हारी सगी भाभी हूँ, कोई पराई नहीं!मैंने भाभी की बात सुनी पर मैंभाभी की चूत मेंबेरहमी से ठोकरें लगाता ही गया. पुलिस पुलिस वाली सेक्सीकुछ ही पलों में उसने मेरे मुँह को अपने लंड पर दबा दिया, उसका वीर्य मेरे गले में उतऱ गया.

उसने मोहन से कुछ कहा तो उसने आकर मम्मी की टांगों को कस कर पकड़ लिया.

इधर मेरा लंड उसकी चूत का आभास पा कर और भी तन गया और उसकी जाँघों से टकराने लगा. सुबह भाभी ने मुझसे गले लगकर मुझे एक अंगूठी दी और कहा- ये तुम्हारे लंड की दिखाई है … इसे पहली चुदाई का प्यार समझ कर लो.

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मैंने उसको सीधा लिटा दिया और उसकी दायीं चूची का निप्पल मुँह में भरकर चूसने लगा और मेरे मुँह में अमृत जैसा दूध आने लगा, जिसके आगे आबे-ज़न्नत भी बेकार था.

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सुरेश ने अपनी पैंट को पूरा निकाल दिया और इस तरह वो भी नीचे से नंगा हो गया. मैं रुक गया… इन्तजार करने लगा कि मेरी बेटी की बुर का दर्द कुछ कम हो जाए. धीरे धीरे राज और मेरी गहरी दोस्ती हो गई और फिर हमारी दोस्ती प्यार में बदल गई.

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मैंने रीतिका की पोज़िशन बदल दी, उसको अपने नीचे लिटाया और पूरा लंड एकदम से डाल दिया.

दुल्हन के कपड़ों में सजी सुनीता दीदी सामने दीवार से चिपकी खड़ी थी, राजन जीजा जी उनको दीवार से सटा कर उनके होंठों को चूस रहे थे और हाथों से दीदी के ब्लाऊज के बटन खोल रहे थे. मुझे उनकी कोई बात समझ नहीं आ रही थी और बहुत अजीब लग रहा था, मगर बर्थ डे के दिन सबको नाराज़ नहीं करना चाहती थी, तो आख़िर मैंने उनकी बात मान ली और उन्होंने मेरी आँख पे पट्टी बाँध दी. अगर मेरी किस्मत में रवि का साथ लिखा है, उसके लंड से चुदने का अहसास लिखा है तो मुझे समलैंगिक होने में कोई परेशानी नहीं है.

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तो अब मैं फ्रीज़ और उसके बीच में फंस गया था और मेरा लंड अकड़ता जा रहा था. बहुत खोजने के बाद तीन बैंगन मिली जो मामा के लंड से थोड़ी पतली और लंबाई और थोड़ी कड़क मिली, मैं झट से घर में लाई और दरवाजा बंद कर दिया. मम्मी ने ससुर को दूर किया और बोलीं- आप अभी कुछ देर के बाद कमरे में आइएगा और सुहागरात मनाईएगा.

आज तक दर्जनों कुंवारी कन्याओं की बुर खोल चुका हूँ, पर ऐसा दुबारा कभी महसूस नहीं हुआ और मैंने भी चरम सुख भोगते हुए बहन की बुर में अपना लावा छोड़ दिया, जिसकी अनुभूति से अर्चना भी खिलखिला कर हंसने लगी, साथ में मामी भी हंसने लगीं.

वो मेरे पास आई और मुझे पलंग पर धक्का दिया और मेरे होंठों पे अपने होंठों को रख कर मेरे दोनों बोबों को दबाने लगी.

मैं भी अपनी गुलाबी गर्म जीभ को उसके मुँह में डालकर चारों तरफ़ घुमाने लगी. उसका जबाव आया कि चुदाई के समय किसी महिला की सील खुली होने का प्रमाण तो मिलने की सम्भावना होती है … मगर एक लड़के के कुंवारे होने का सबूत कैसे जांचा जा सकता है?मैंने लिखा- जाना तो जा सकता है … मगर इसके लिए आपको बहुत पारखी होना जरूरी होगा. सेक्सी वीडियो 2020 इंग्लिशमुझे तो चुत में मज़ा आ गया आह…संजय- अब मेरे ऊपर लेट जा ताकि साहिल तेरी गांड भी मज़ा ले सके, उसके बाद तेरी हम दोनों ताबड़तोड़ चुदाई करेंगे.

सोचने लगा।मैं उनकी छत पर से आंटी की पैंटी चुरा लेता था और उसे सूँघता था. आज तक दर्जनों कुंवारी कन्याओं की बुर खोल चुका हूँ, पर ऐसा दुबारा कभी महसूस नहीं हुआ और मैंने भी चरम सुख भोगते हुए बहन की बुर में अपना लावा छोड़ दिया, जिसकी अनुभूति से अर्चना भी खिलखिला कर हंसने लगी, साथ में मामी भी हंसने लगीं. जितनी भी चर्बी थी, सब चली गई थी, जैसे कमर का सब फ़ैट उसके हिप्स में आ गया हो.

लंड का अहसास होते ही रीना ने मेरा लंड छोड़ कर दोनों हाथ से अपना मुँह ढक लिया. मैं इन्हीं ख्यालों में था कि उसने कहा- और खाएगा क्या?मैंने कहा- नहीं, मेरा पेट भर गया.

मैंने कहा- नहीं यार 15-20 दिन में एकाध बार… क्योंकि शॉप के चक्कर में ज्यादा बिज़ी रहते हैं.

मैंने किस करते करते मोनिका के चूतड़ दबाए, चूचे दबाए, उसने कोई आपत्ति नहीं जताई. अब मैंने भी धक्के मारने शुरू किए और कुछ देर दीदी की गांड मारने के बाद उनकी गांड में ही झड़ गया. लेकिन कोई शक न हो इसलिए रात को मेरी औरत को चोदने का नाटक करना पड़ता था.

गुजराती देसी सेक्सी वीडियो ओपन मेरा मन अब मौसी से भर चुका था, पर मौसी की चूत की आग ठंडी ही नहीं होती थी. अन्तर्वासना साईट का एक बार फिर से बहुत बहुत धन्यवाद, जिसकी वजह से ये कहानियाँ आप तक पहुँच पाती हैं.

‘बुद्धू काहे की…?’‘उस लड़की को बहुत मजा आ रहा है… वो चिल्ला थोड़ी रही है, चुदाई के मजे ले रही है… वो भी तीन तीन जगह से… तू नहीं समझेगी… मैं शुरू से प्ले करती हूँ. फिर मैंने भी कहा- हां रियु, ऐसा लगता तो नहीं कि कोई किसी पे यहाँ जबरदस्ती कर रहा है, मगर जैसा मेरी ने कहा कि एशियाई लड़कियों की यहाँ डिमांड है तो शायद हम दो बाहर हैं और 3-4 अंदर दिख रही हैं, तो क्या हम सब सह पाएंगी?रिया ने कहा- पता नहीं! मगर मुझे पूछेगी तो कोशिश करते है. अब तो मुझे अपने आपको रोकना बहुत ही मुश्किल हो गया था क्योंकि किसी भी आदमी का लंड जब कोई औरत अपने नरम और मुलायम होंठों से चूसती है तो कितना मजा आता है.

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मेरे पति ने मेरे मम्मे बहुत मसले हैं, शादी से पहले ही मसलता था, जब हम मिलते थे, अब मेरे मम्मों के साइज़ से तो अंदाज़ लगा कि मुझे वो कितना मसलता था. असल में मेरा पति काम की वजह से थकता है, नहीं तो मैं उसके साथ दो लड़कियां कैसे पैदा करती? आहह सुन इतना बेरहम मत बन, आराम से मेरा सीना हौले हौले मसल न.

अब तुम भी इस बात को समझ जाओ तो अच्छा रहेगा, नहीं तो सारी लाइफ मेरे बारे में सोचकर परेशान रहोगे.

मैं उन पर पागलों की तरह टूट पड़ा और उन्हें बहुत जोरों से चूसने लगा. मैं जैसे चाहूँगा तुझे चोदूँगा, जितना चाहूँगा मारूँगा समझी? तेरी जैसी रंडी चूत को मार मार कर चोदने से तुम हमेशा हमारे हमारे लंड की गुलाम रहती हो. वो बेचैन होने लगी और मेरे लैंड को मेरी पैन्ट के ऊपर से ही पकड़ने लगी.

फिर पूरी तरह से आपकी!”ओके डार्लिंग बेबी, ट्रीट योरसेल्फ वेल!”बस अभी आती हूँ. कुछ ने तो सीटियां मारी।हम आगे बढ़ी तो एक बेहद सुन्दर लड़की ने आकर मुझे आगोश में लिया, मेरे होंठों को किस करते हुए कहा- ओह बेबी… आज तो तुम्हें भगवान् ही बचा सकता है!मैंने और रिया ने एक दूसरी की तरफ देखा, पता नहीं क्यों मगर हम एक दूसरी की तरफ देखकर हंस पड़ी और फिर उस जादुयी दुनिया में खो गयी. उफ्फ्फ… आह… अम्म आह मम्मी मारा डाला… क्या मजा आ रहा था…मम्मी चूत रगड़े जा रही थी और दोनों से मेरी चूची दबाये जा रही थी, कभी मेरे ओंठ चूस रही थी और तो कभी मेरे गालों को काट रही थी.

मैं अपनी रियल इंडियन सेक्स स्टोरी अन्तर्वासना पर शेयर करने जा रहा हूँ। मैं अमदाबाद गुजरात का रहने वाला हूँ।ये उन दिनों की बात हैं जब मैं कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था।मुझे जंक फ़ूड खाना बहुत पसन्द है इसलिए मैं थोड़ा स्थूल जिस्म का हूँ और मेरा लंड 6 इंच का है।अब मैं अब आपको अपना पहला सेक्स अनुभव बताने जा रहा हूँ।मैं कॉलेज बस से जाया करता था.

बीएफ पिक्चर देना: मैंने कहा- आपका कोई बॉयफ्रेंड है?उसने कहा- आप क्यों पूछ रहे हो?मैंने बोला कि बस ऐसे ही. मॉल पहुँचते पहुँचते टाइम छः से ऊपर ही हो गया, अंधेरा होने लगा था और मॉल में अच्छी चहल पहल हो गई थी.

रूपा ने जब 1-2 बार मुड़ के ज़रा नाराज़गी से उसे देखा तो उसने सोचा कि मैं जानबूझ के कुछ नहीं कर रहा तो भी ये औरत मुझ पे क्यों बिगड़ रही है? वो उस औरत को पीछे से देखने लगा. इधर एक बात बताता हूँ दोस्तो मुझे भी पहले दिन से ही सुरैया भाभी पसन्द थी. मैं अपना लंड पैन्ट से बाहर निकाल कर हाथ से रगड़ने लगा और मुठ मारने लगा.

नीचे मेरा लंड चुत में जड़ तक समाया हुआ था और ऊपर से दीपक का लंड उसकी गांड फाड़ने को तैयार था.

मैंने भी उसके लंड की मालिश की और फिर समीर ने मेरी गांड को निशाना बनाया. चूँकि विनीता अब स्वतंत्र थी लिहाजा अपने एनजीओ की जॉब के साथ जयपुर में अकेले ठाठ से रहती थी. जब वो ऊंची ऐड़ी की सैंडल पहन कर चलती तो उसकी वो गांड बड़ी मस्त ठुमकती थी.