आंटी बीएफ फिल्म

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अब वो मोना की जांघें दबा रही थी और मोना और ऊपर और ऊपर करके उसे चुत के एकदम पास दबाने को बोल रही थी. मैं पहली बार दो लड़कों से एक साथ चूत और गांड चुदवा रही थी तो दर्द से ‘आआईईई मेरी माँ आआह्ह ह्ह बचा लो आआह्ह्ह आराम से… अह्ह्ह्ह्ह…’ कहकर रो ही पड़ी. मैंने कहा- कोई बात नहीं भाभी आप का मेरे ऊपर पूरा हक है, हाथ जहां मर्जी रख लें.

मैंने अनुराधा के मम्मे दबाते हुए कहा- तेरे भी तो ये बड़े हो गए है ना. पर एक दिन वो खुद फिर से नहाने गईं और हर बार की तरह आज भी चाची ने दरवाजा खुला छोड़ा था. इतना कहते हुए सुमन उठ गई और बहुत आराम से पीछे मुड़ी ताकि गुलशन जी को संभलने का मौका मिल जाए और वो लंड जो तना हुआ है उसे वो छुपा लें.

उसने अपना लंड ठीक किया पैन्ट के ऊपर से ही और मेघा की चूत जो पेंटी पहने होने के कारण छुपी हुई थी, नहीं तो शर्ट तो ऊपर हो गई थी. उसने एक झटके में अपने और कविता के कपड़े उतार दिए और दोनों हंसती हुई शावर के नीचे खड़ी हो गयीं.

राहुल ऋतु के बदन को चूम रहा था और ऋतु धक्के लगाते लगाते थक चुकी थी.

उन्होंने उसी पल मुझे वो किराया और पिछला जमा किया अडवांस लौटा दिया और बोले- अगर तुम मुझे ये रूपए बाद में दे दो, तो भी कोई बात नहीं, अभी ये तुम रख लो, तुम्हें जरूरत है.

मैं भी मामा जी की जीभ को अपने अंदर खींचने लगी, मामा जी की खुरदरी जीभ मेरी मुँह में जैसे स्ट्रा-बेरी का अहसास करा रही थी. सुधीर- तुम आख़िर चाहती क्या हो? ऐसी बातें करके मुझे पागल बना रही हो और कुछ करूँगा तो गुस्सा हो जाओगी।मोना- लड़की का असली गुस्सा शायद तुमने देखा ही नहीं हा हा हा. मैं कुछ समझी नहीं?टीना- सुन संजय ने तुझे चुत चूस कर मज़ा दिया और तुझे इतना तड़पाया.

इस बीच चाची और जोर से चीखी- आह्ह्ह रा रर अशोक… मर गईइईई ईई उईई निकाल अपना लंड… आह्ह्ह मुझे नहीं चुदना है… अह्हह्ह होईई उईई…!मैंने चाची की दोनों चूची को दबाते हुए पूछा- क्या दर्द हो रहा है?चाची ने कहा- साले, एक बार में ही घुसा देते हो, इस बार तो मेरे बच्चेदानी के अंदर है तुम्हारा लंड… आह्हह्ह कितना टाईट है और पूछता है दर्द कर रहा है. अगल दिन उन्होंने फेसबुक पर बात करने की इच्छा ज़ाहिर की तो मैंने दो नये फेसबुक अकाउंट बनाकर एक उनको दे दिया और एक से मैंने लॉग इन किया. मैंने अपनी एक उंगली सुलेखा की गांड में कर दी, सुलेखा चुदाई के मज़े से सिसकार रही थी और बोले जा रही थी- उफ़ उई आह आह चोद चोद साले चोद.

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पीटर ने मुझे दीवार को चिपकाया और वो फिर से अपना हलब्बी लौड़ा मेरी चूत के अंदर बाहर करने लगा. वो भी गांड उछाल-उछाल कर चुदाई में साथ दे रही थी।करीब 15 मिनट बाद वो झड़ गई और मुझसे लिपट गई, अब वो मुझसे कहने लगी- ऐसा मेरे साथ पहली बार हुआ है.

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शाम को सुमन का दिल बहुत बेचैन था आज की संजय की हरकतें उसे बार-बार याद आ रही थीं और दूसरी तरफ़ उसके पापा का टेंशन भी उसको सता रहा था. ममता ने एक के बाद एक सवाल पूछने शुरू कर दिए- भाभी, कहाँ हैं बच्चे कितने हैं वगैरह वगैरह. मैंने कहा- मौसी, ये जो तुम मेरे लुल्ले चूस रही हो न, इसमे मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है.

मैं उनके पैरों की तरफ आया, धीरे से साड़ी को उठाया और जैसे ही मैं साड़ी ऊपर खिसकाने लगा, चाची ने करवट बदल ली.

उसने पीछे से पकड़ कर मुझे उठा लिया और बगल में रखी टेबल पर बिठा कर मेरी नाईट ड्रेस का पजामा निकाल दिया. मुझे उस बेचारी पर बहुत तरस आ रहा था कि उसे गर्म करके ऐसे ही जा रहा हूँ.

आप सभी मेरे पाठक हैं मेरी कहानियों को पसंद करते हैं मैं आपका हमेशा तहे दिल से शुक्रगुजार करता हूं. संजय और वीरू का तो बड़ा मन था कि सुबह सुबह एक राउंड और हो जाए मगर उनकी फ्लाइट में टाइम कम बचा था इसलिए टीना ने मना कर दिया. अबकी बार सुपारा अन्दर जाकर फंस गया और वो जोर से उछल कर चिल्लाने लगी- अह जीजू ,मर गई.

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मैंने लंड को योनि के छिद्र पर टिका कर हल्का सा धक्का लगाया तो लंड का सुपारा योनि के अन्दर घुस गया, योनि का छिद्र मेरे लंड पर रबर के छल्ले की भांति फंस गया. अब तो बस मेरे दिमाग में उसका मोटा ताजा लंड लंड ही घूम रहा था और मैं इसी जुगाड़ में था कि इसका लंड अब कैसे लिया जाये. वो मेरे पास आई और मेरे सामने अपने मम्मे, नाभि, चूत और गांड पर हाथ फेरते हुए बोली- रवीश, तुम्हारा फिजिकल एक्जामिन होना है!इतना कहने के साथ ही वो घूमी और थोड़ा झुकते हुए अपनी पैन्टी को गांड की दरार से अलग करती हुई बोली- तू अपने फिजिकल एक्जामिनेशन के लिये तैयार हो जा!इतना कहने के साथ ही उसने अपनी पैन्टी के दोनों तरफ का बन्धन खोल दिया, उसकी पैन्टी एक झटके में उसके जिस्म से अलग हो गई.

अगले दिन जब वो स्कूल से घर आई तो मैं पहले से उसका इंतजार कर रहा था. टीना- अरे अब जाने दे, तू जब उठ गया था तो कुछ बोला क्यों नहीं, बस इसी लिए मुझे गुस्सा आया और सुमन जो कर रही थी, मैंने ही तो इसे कहा था ताकि तुझे आराम मिले. हम ये पैसे के लिए थोड़ी कर रही है? हमें कौन सी कमी है पैसे की? जिंदगी के मजे लेने हैं बस! तुझे नहीं आना तो लौट जा.

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मगर मौसी कहती- नहीं, तुम्हारे बाद मुझे किसी और मर्द की ज़रूरत नहीं है.

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कविता को विनय के ऑफिस में ही एकाउंट्स हेड की पोस्ट पर काम करने वाला कुशाग्र पसंद था.

‘आपको तो हंसी ही आयेगी भाबी जी, खैर लंड तो हमारा है, हमें पता है उठे, फनपते लंड का दर्द क्या होता है जब उसे कोई रसीली सी चूत चोदने के लिए न मिले तो!’‘अरे! तिवारीजी आप तो नाराज़ हो गये, अरे बाबा, मैं आपको पक्का जन्नत की सैर करवाऊँगी, लेकिन यह सही वक़्त नहीं है, आप तो जानते ही हैं कि विभु कितना नल्ला है और कभी भी घर पे दस्तक दे सकता है. फिर चाची ने टीवी बन्द कर दिया तो मुझे लगा शायद अब चाची सोना चाहती हैं. मैंने फिर पापा की शेविंग किट निकाली और अपनी चुत पर पापा वाली शेविंग क्रीम लगाई.

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अभी तक तो कुछ फ़र्क नहीं लगा, हाँ टीना ने बताया तू अब फास्ट हो गई है. दो मिनट तक मामा ऐसे ही धीरे-धीरे लंड को अन्दर-बाहर करते रहे और मेरे होंठ को चूसते रहे. मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया और लंड डाल कर रुक गया.

पहले तो मैंने मना किया, फिर वो चूसने की जिद करने लगीं, तो मैं भी शुरू हो गया.

इस समय तक स्वान बार्बी डॉल के नीचे से निकल कर अपने घुटने गद्दे पर टिकाए उसके पीछे पोजीशन बना चुका था.

सुई जिस रंग पर जाकर रूकती है, उस खिलाड़ी को एक विशेष चटाई, जिस पर एक विशेष क्रम में अलग-2 रंग के खाने बने होते हैं, सुई के रुकने वाले रंग के खाने पर पहले अपने पैर, फिर हाथ, घुटने, कोहनी और अंततः सिर, या शरीर का कोई दूसरा अंग टिकाना होता है! खेल में जो सुई की शर्त को पूरा नहीं कर पाता, उसकी हार हो जाती है. लंड का गुलाबी टोपा मेरे मुँह में जाते ही मुझे नमकीन और खट्टे स्वाद का मजा आने लगा मानो मुझे मामा जी ने लेमनचूस खिला दिया हो जो कभी हम बचपन में ट्रेन से यात्रा के दौरान खाया करते थे. बुर की चुदाई सेक्सी हिंदीकुछ दिन हुये, हम सब दोस्त बैठे पेग शेग लगा रहे थे कि तभी एक दोस्त ने कहा- यार आज मौसम बड़ा अच्छा, दारू पीने का भी बहुत मज़ा आ रहा है, ऐसे में अगर साथ में एक रंडी चोदने को मिल जाए, तो मज़ा और भी दुगना चौगुना हो जाए.

उसने मेरी आँखों में बड़े प्यार से देखा तो मैंने आगे बढ़ कर उसके होंठों को अपने होंठों में ले लिया और चूसने लगा. वो तो गोरे-गोरे सॉफ्ट गेंद की तरह थे। मैं उन मम्मों को बड़ी बेताबी से चूस रहा था।कोई 5 मिनट के बाद उसने बोला- सिर्फ़ तुम ही चूसते रहोगे या मुझे भी लॉलीपॉप चूसने का मौका दोगे?मैं उसकी बात समझते हुए उठा और उसने मेरे सारे कपड़े उतार कर मेरा 7 इंच का लौड़ा अपने हाथ में ले लिया।उसने बोला- अरे वाह. अभी दर्द रुका नहीं कि फिर एक जोरदार धक्का मारा और पूरा लण्ड मेरी गांड में घुसा दिया.

यश के मुख से एक आह निकली और उसने खुद पे कंट्रोल रखने के लिए मेरे बालों को कस के पकड़ कर खींचा. तो उन्होंने कहा- लगता है आज ज़्यादा ही गौर से देख रहे हैं?मैं सिर्फ़ मुस्कुरा के रह गया.

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वो ठीक दस बजे पहुँच गई और कमरे की सजावट देखकर एकदम हैरानी से इधर-उधर देखने लगी. रात को मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था और आज मैंने सोच ही लिया था कि आज तो कैसे भी करके कुछ जरूर करूँगा. इतना सुनकर में वहाँ से जाने लगा और उदास होकर सोचने लगा कि हर बार मेरे साथ ही इस क्यों होता है कि मुझे लंड के लिए तरसना पड़ता है.

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चाची ने फिर से मेरा लंड पकड़ लिया और बोलीं- ला मैं तेरा वीर्य निकाल देती हूं… पर मेरी नुन्नू में नहीं डालने दूंगी. जिससे वहाँ का माहौल गर्म हो जाता और फ्लॉरा भी इन सबका खुलकर मज़ा ले रही थी।खाने के बाद संजय ने म्यूज़िक लगा दिया और सब उस पर थिरकने लगे। फ्लॉरा पहले तो संजय के साथ नाच रही थी. और मैं वैसे ही सोचते-सोचते उसकी नंगी मम्मी की कल्पना करने लगा था जैसा कि सोनू मुझे उनकी चुदाई के बारे में बताया करती थी.

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मगर तू क्यों जागी हुई है? तुझे नींद नहीं आ रही क्या?सुमन- कब से सोने की कोशिश कर रही हूँ. मनोज सवेरे-सवेरे आने वाला था, इन्होंने फोन लगाया तो वो बोला- भैया ग्यारह बजे तक पहुँच जाऊँगा, खाना साथ ही खाएँगे. मैंने ध्यान से देखा कि दीदी के स्तन दिख रहे थे और उनकी पैंटी भी कुछ दिख रही थी.

कोमल- हेलो, बोलो जमीला डार्लिंग क्या कर रही हो?जमीला- कुछ नहीं भाभी, बस नंगी हूँ और चूत चटवा रही हूँ. तभी देवेन्द्र अंकल की लड़की जिसका नाम पूजा था, हम लोगों के लिए चाय लेकर आई, और हम को देखकर खुश हुई, उसने हल्का सा मुस्कुरा कर नमस्ते किया.

फेरों का समय आया जिसमें ज़्यादा वक़्त तो लग ही जाता है, मेरे कुछ दोस्त खाना खाने चले गये और मैं पुजारी को किसी सामान की ज़रूरत ना पड़े इसलिए वहीं रुक गया, दोनो फॅमिली के मेंबर भी फेरे वाले मंडप को घेरे हुए बैठे थे तो मैं भी सबके पीछे कुर्सी लेकर बैठ गया, पंडित को जब भी किसी चीज़ की ज़रूरत पड़ती, मैं उसे लाकर दे देता.

अब मनीष ने नीचे लेट कर मेरी चूत में अपना लंड सरकाया और यश ने पीछे से बिना कोई वार्निंग ‘आअह्ह मेरी रांड… आआह्ह्ह… ले’ कह कर एक ही झटके में जड़ तक लंड अंदर कर दिया. वैसे इसका सेवन डॉक्टरी सलाह से करें, तो ज्यादा बेहतर होगा, ज्यादा दवाई खाना किडनी को नुकसान पहुंचाता है और दवाई खाने के दूसरे दिन सर भारी लगता है. यह हॉट कहानी मेरे मामा के लड़के और उनकी पत्नी के साथ ग्रुप सेक्स की कहानी है.

अपने शानदार, सफ़ेद दांतों की पंक्तियों को दिखाते हुए मेरी अप्सरा जैसी सुन्दर पत्नी आँखें बंद कर, हॉलीवुड स्माइल के साथ अपनी मखमली-गुलाबी जीभ बाहर निकाले तैयार हो चुकी थी. आधे मिनट के किस में उसने तो मेरा सारा बदन नाप दिया।फिर हमें अकेले छोड़ वो चले गए. com/teen-girls/padosi-sangita/ बुर में उंगली डाल कर अन्दर बाहर करता.

बदले में मैंने उसके निप्पल खींच कर कहा- तू भी पूरी की पूरी बाजारू लग रही है.

आंटी बीएफ फिल्म: हमारी तो जैसे महफिल से रौनक ही चली गई हो, मगर फिर भी हमने सब आपस में उसके हुस्न की और इधर उधर की बातें करते हुये, अपने पेग का प्रोग्राम जारी रखा. कुछ ही पलों में मेरे कमरे की घंटी बजी, मैंने दरवाज़ा खोला और मेरे सामने मेरे सपनों की रानी खड़ी थी.

मेघा के होंठों पर काटने का निशान था तो मैं समझ गया कि वो मस्ती कर के आये हैं. वो उत्तेज़ित हो गई और चुत के पानी चोदने से लंड को भी फिसलने में मदद मिल गई. उसे देखकर मुझे बहुत ख़ुशी हुई, मैंने आगे बढ़ कर उसे हग किया तो मेरे मम्मे उसकी चौड़ी छाती पे दब गए.

मनीष मेरे पीछे होने की वजह से मेरी पीठ उसके सीने के बालों से रगड़ खा रही थी औरउसका लंड मेरे नंगे चूतड़ों से रगड़ खा रहा था.

एक बार मैंने उससे मिलने के लिए कहा और हम एक पिज़्ज़ा सेंटर पर मिले. लटकने की वजह से उसके मम्मे काफी बड़े लग रहे थे और मेरी हथेली में भी नहीं आ रहे थे. कई तरह से अपनी सासू माँ को चोदने के बाद जमाई ने संगीता को वापस बिस्तर पर लिटा कर सासू माँ की चूत में अपना रस डाल दिया.